लद्दाख में ABVP की जीत से BJP खेमे में उत्साह, अमित शाह का राष्ट्रवाद वाला संदेश; कांग्रेस पर भी सवाल

लेह। लद्दाख की यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया है। आठ पदों के लिए हुए चुनाव में संगठन के पांच उम्मीदवारों की सफलता ने क्षेत्रीय राजनीति में भी चर्चा तेज कर दी है। जहां ABVP इसे छात्रों के भरोसे और संगठन की सक्रियता का परिणाम बता रही है, वहीं लद्दाख के कुछ क्षेत्रीय नेताओं ने चुनावी नतीजों पर सवाल उठाए हैं। इस बीच कांग्रेस की भूमिका को लेकर भी विपक्षी खेमे से तीखी टिप्पणी सामने आई है।
अध्यक्ष से लेकर खेल सचिव तक ABVP के पांच उम्मीदवार जीते
3 नवंबर 2026 को सामने आए चुनाव परिणामों के मुताबिक, ABVP ने छात्रसंघ के आठ में से पांच पदों पर जीत हासिल की। विजयी उम्मीदवारों में शामिल हैं:
अध्यक्ष: दावा नामग्याल
उपाध्यक्ष: त्सेरिंग यांगडोल
महासचिव: स्टैनजिन रिगजोल
संयुक्त सचिव: रबस्किट डोलमा
खेल सचिव: तेनजिन त्सेवांग
शेष तीन पदों पर स्टैनजिन इंगजाल (कोषाध्यक्ष), मेफाम आंगमो (सांस्कृतिक सचिव) और शराफत अली (मीडिया सचिव) चुने गए।
ABVP ने बताया युवाओं के भरोसे का परिणाम
ABVP के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सचिव सन्नक श्रीवत्स ने पांच पदों पर जीत को संगठन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि यह परिणाम छात्र हितों, शैक्षणिक विकास और जिम्मेदार छात्र नेतृत्व के प्रति युवाओं के भरोसे को दर्शाता है।
ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य दोरजे नामग्याल ने भी नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई दी। संगठन ने कहा है कि उसके प्रतिनिधि विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं, अधिकारों और शैक्षणिक हितों को प्राथमिकता देंगे।
https://x.com/AmitShah/status/2117956821004754972?a=rQLKK1iFJS4tamY_GNA&s=19
क्षेत्रीय नेताओं ने उठाए सवाल, कांग्रेस पर भी निशाना
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद लद्दाख के क्षेत्रीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरूक ने नतीजों पर हैरानी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्र नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पैसे खर्च किए गए होंगे। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण पेश नहीं किया।
लकरूक ने कांग्रेस की चुनावी मौजूदगी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी कहीं नजर नहीं आई और उसे पता ही नहीं चला कि कैंपस में क्या हो रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस आखिर कहां सोई हुई थी।
वहीं, ABVP के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दोरजे नामग्याल ने खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज किया। चुनाव में विजयी महासचिव स्टैनजिन रिगजोल ने भी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया।
https://x.com/nitin_gadkari/status/2118216632862753135?a=m5LylUwaOUIEV7HicGU&s=19
कुछ पूर्व छात्र नेताओं ने भी जताई असहमति
यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष स्टैनजिन कुनसाल ने भी नतीजों को लेकर अलग दावा किया। उनके मुताबिक, अध्यक्ष पद पर जीतने वाले उम्मीदवार को छोड़कर बाकी कुछ विजयी उम्मीदवार चुनाव के बाद ABVP से जुड़े प्रतीत होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से विपक्षी मतों का बंटवारा हुआ हो सकता है।
इस तरह चुनाव के परिणामों को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। ABVP इसे अपनी संगठनात्मक सफलता बता रही है, जबकि कुछ क्षेत्रीय नेता चुनावी प्रक्रिया और उम्मीदवारों के संगठन से जुड़ाव पर सवाल उठा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमित शाह और नितिन गडकरी ने दी बधाई
लद्दाख विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी बधाई दी। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इसे युवाओं के बीच राष्ट्रवाद के प्रति समर्थन से जोड़ते हुए टिप्पणी की। गडकरी ने भी परिणाम को युवा भारत के राष्ट्रवाद, एकता और राष्ट्र निर्माण की भावना में भरोसे का संकेत बताया।
छात्रसंघ का नतीजा, लेकिन चर्चा क्षेत्रीय राजनीति तक पहुंची
लद्दाख में छात्रसंघ चुनाव ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां भी चल रही हैं। कांग्रेस ने चुनावी रणनीति बनाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को लद्दाख भेजा है। ऐसे में विश्वविद्यालय के परिणामों को राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय संगठनों के लिए युवाओं के बीच अपनी पहुंच समझने के एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को पूरे लद्दाख के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता। छात्र मुद्दे, क्षेत्रीय अधिकारों की मांग और स्थानीय निकाय चुनावों के समीकरण अलग-अलग हैं। फिलहाल पांच पदों पर ABVP की जीत ने लद्दाख के कैंपस के साथ-साथ क्षेत्रीय सियासत में भी बहस छेड़ दी है।
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