योगी का अयोध्या से विपक्ष को सीधा संदेश, बोले- रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले पहले माफी मांगें, फिर रामलला के दरबार आएं

अयोध्या। रामनगरी में दीपोत्सव के दसवें संस्करण के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और संतों पर लाठियां बरसवाईं, उनका अयोध्या में स्वागत है, लेकिन उन्हें पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम सबके प्रति कृपालु हैं और सच्चे मन से पश्चाताप करने वालों को क्षमा कर देंगे।
शनिवार को आयोजित दीपोत्सव समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अपने संबोधन में योगी ने राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष से लेकर आधुनिक अयोध्या के विकास तक का जिक्र किया। उनका भाषण धार्मिक संदेश के साथ-साथ विपक्ष के लिए स्पष्ट राजनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों को योगी की दो टूक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर हुई गोलीबारी और संतों पर हुए लाठीचार्ज का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या को कभी रक्तरंजित किया, वे आज यहां आना चाहते हैं तो जरूर आएं, लेकिन पहले अपने पुराने कृत्यों के लिए माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब अयोध्या में 'जय श्रीराम' बोलने पर गोलियां चलती थीं। आज उसी रामनगरी में दीपोत्सव के माध्यम से त्रेता युग की स्मृतियों को जीवंत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब अयोध्या में न कर्फ्यू लगेगा और न ही किसी को रामभक्तों पर गोली चलाने या संतों का अपमान करने का दुस्साहस करने दिया जाएगा।
योगी का यह बयान सीधे तौर पर राम मंदिर आंदोलन के इतिहास और उस दौर की तत्कालीन सरकारों की भूमिका को लेकर भाजपा की राजनीतिक लाइन को सामने रखता है।

कथा की मर्यादा और मुशायरे पर भी विपक्ष को घेरा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर धार्मिक आयोजनों की मर्यादा को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग कथा और मुशायरे के बीच का अंतर तक नहीं समझते और अपनी अनुचित गतिविधियों से धार्मिक आयोजनों की पवित्रता प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी अदालतों में श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, वे आज राम के अस्तित्व को स्वीकार कर रहे हैं। योगी ने इसे वैचारिक विजय बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र सामाजिक समरसता और सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में किसी विपक्षी नेता का नाम लेकर इन सभी टिप्पणियों को नहीं जोड़ा, लेकिन उनके बयानों को राम मंदिर आंदोलन और विपक्ष की पुरानी राजनीतिक भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है।
श्रीराम भारत की चेतना और आत्मसम्मान के प्रतीक
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल धार्मिक आस्था के विषय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई 'अवधपुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई' का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की अयोध्या को देखकर त्रेता युग की अनुभूति होती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा कर प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने पर जिस तरह पूरी नगरी सजी होगी, आज का दीपोत्सव उसी दृश्य की याद दिलाता है। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में संतों, कारसेवकों और अशोक सिंघल के योगदान को भी याद किया।
योगी ने कहा कि श्रीराम ने वनवासी समाज, निषादराज और माता शबरी को अपनाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। आज राम जन्मभूमि परिसर में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, माता शबरी और गृध्रराज जटायु से जुड़े प्रसंगों को स्थान मिलना उसी व्यापक दृष्टि का प्रतीक है।
25 हजार दीपों से शुरू हुआ सफर, इस बार 30 लाख दीपों का लक्ष्य
दीपोत्सव की यात्रा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी शुरुआत 25 हजार दीपों से हुई थी और अब यह आयोजन बड़े वैश्विक उत्सव का रूप ले चुका है। इस बार अयोध्या में 30 लाख दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव अब केवल अयोध्या तक सीमित आयोजन नहीं रहा, बल्कि दुनिया के करोड़ों रामभक्तों को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाला उत्सव बन चुका है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को भी नई पहचान दे रहा है।

तीन घंटे बिजली से सोलर सिटी तक पहुंची अयोध्या: योगी
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले शहर को सीमित समय के लिए बिजली मिलती थी, लेकिन अब इसे स्मार्ट सिटी के साथ सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने धर्म पथ, भक्ति पथ, श्रीराम पथ और जन्मभूमि पथ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मार्गों ने श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी की गई हैं या उन पर काम चल रहा है।
योगी ने कहा कि कभी अयोध्या में हवाई अड्डा तक नहीं था, लेकिन अब महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मौजूद है। राम की पैड़ी में सरयू का जल प्रवाहित हो रहा है। माता शबरी के नाम पर रसोई और निषादराज के नाम पर रैन बसेरे भी आधुनिक अयोध्या की पहचान का हिस्सा बन रहे हैं।
विपक्ष के लिए राम मंदिर आंदोलन फिर बना राजनीतिक चुनौती
योगी आदित्यनाथ का यह भाषण केवल दीपोत्सव की शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन, कारसेवकों के बलिदान, अयोध्या में पुरानी व्यवस्था और मौजूदा विकास को एक साथ रखकर विपक्ष को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की।
भाजपा के लिए राम मंदिर और कारसेवकों का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का प्रमुख हिस्सा रहा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के सामने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट रखने की चुनौती रहती है। योगी का माफी वाला बयान विपक्ष को फिर उसी ऐतिहासिक बहस के केंद्र में लाने का प्रयास माना जा सकता है।
आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस तरह के बयान राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, मतदाताओं पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। अयोध्या के विकास, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दे भी चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

उपराष्ट्रपति और कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
दीपोत्सव के दसवें संस्करण में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह, राकेश सचान और सतीश चंद्र शर्मा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इसके अलावा महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह और अनेक संत-महंतों ने समारोह में हिस्सा लिया। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर, स्वामी श्रीधराचार्य, स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीमहंत कमलनयन दास, श्रीमहंत राम लखन दास और जगद्गुरु सतुआ बाबा सहित कई धार्मिक हस्तियां उपस्थित रहीं।
दीपोत्सव के मंच से योगी आदित्यनाथ ने एक ओर रामराज्य की अवधारणा को साकार करने का आह्वान किया, तो दूसरी ओर विपक्ष को राम मंदिर आंदोलन के इतिहास पर जवाब देने की चुनौती भी दी। अब देखना होगा कि इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या आती है और अयोध्या का मुद्दा 2027 के चुनावी विमर्श में किस तरह आगे बढ़ता है।
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