बिस्मिल्लाह खान के घर पर बुलडोजर का दावा निकला गलत? अखिलेश ने BJP को घेरा, परिवार बोला- हम खुद बना रहे हैं म्यूजियम

वाराणसी। भारत रत्न और शहनाई के महान कलाकार उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी मकान को तोड़े जाने का मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर मकान का वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार पर कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ होने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे देश के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सत्ता में आने पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की सांगीतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए 'श्रवण-संग्रहालय' बनाने का वादा भी किया।
लेकिन इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब खुद बिस्मिल्लाह खान का परिवार सामने आया और अखिलेश यादव के दावे को गलत बताया। परिवार का कहना है कि मकान पर सरकार का बुलडोजर नहीं चला है। पुराना भवन बेहद जर्जर हो चुका था, इसलिए परिवार के सदस्य आपसी सहमति से उसका पुनर्निर्माण करा रहे हैं। खास बात यह है कि परिवार भी उसी स्थान पर उस्ताद की यादों को सहेजने के लिए म्यूजियम बनाना चाहता है।
इस पूरे विवाद में अब तीन अलग-अलग पक्ष सामने हैं—अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप, परिवार का अपना पक्ष और नगर निगम-विकास प्राधिकरण की आधिकारिक सफाई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मकान तोड़ने का फैसला किसने लिया, सरकारी म्यूजियम की योजना क्या थी और परिवार ने उससे दूरी क्यों बनाई?
अखिलेश यादव ने क्या आरोप लगाया?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिस्मिल्लाह खान के पुराने मकान का वीडियो साझा किया। उन्होंने भाजपा और उसकी विचारधारा से जुड़े लोगों पर कला और कलाकारों के खिलाफ होने का आरोप लगाया।
अखिलेश ने अपनी पोस्ट में लिखा कि रचनात्मक लोग समाज में बदलाव और सहिष्णुता को बढ़ावा देते हैं, लेकिन संकीर्ण सोच रखने वाले लोग कला को अपने एजेंडे के रास्ते में बाधा मानते हैं। उन्होंने भारत रत्न से सम्मानित कलाकार की साझा सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करना देश के सम्मान को नुकसान पहुंचाने जैसा बताया।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की सांगीतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए 'श्रवण-संग्रहालय' बनाया जाएगा।
इस बयान के जरिए सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार को सांस्कृतिक विरासत के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। लेकिन उनके पोस्ट के बाद परिवार और प्रशासन की सफाई ने इस राजनीतिक आरोप की तस्वीर बदल दी।

परिवार ने कहा- सरकारी बुलडोजर नहीं चला, हम खुद करा रहे हैं निर्माण
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पौत्र सिफ्तेन हुसैन और अफाक हैदर ने अखिलेश यादव के दावे पर आपत्ति जताई। परिवार के सदस्यों के मुताबिक, मकान काफी पुराना और जर्जर हो चुका था। उसकी स्थिति ऐसी थी कि कभी भी दुर्घटना हो सकती थी। इसी वजह से परिवार ने पुराने ढांचे को हटाकर नए सिरे से निर्माण कराने का फैसला लिया।
परिवार ने स्पष्ट किया कि इस काम में न तो नगर निगम का बुलडोजर लगा है और न ही प्रशासन की ओर से मकान गिराने की कार्रवाई की गई है। परिवार के सदस्य आपसी सहयोग से अपने स्तर पर पुनर्निर्माण करा रहे हैं।
परिवार ने यह भी कहा कि संभव है अखिलेश यादव को अधूरी या गलत जानकारी मिली हो, जिसके आधार पर उन्होंने वीडियो साझा कर दिया। परिवार के अनुसार, मकान के आसपास की गलियां काफी संकरी हैं और वहां भारी बुलडोजर पहुंचना भी आसान नहीं है।
ग्राउंड फ्लोर पर म्यूजियम, पहली मंजिल पर रहेगा परिवार
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू परिवार की म्यूजियम बनाने की योजना है। परिवार के मुताबिक, पुराने भवन को हटाकर नया मकान बनाया जाएगा। इसके भूतल यानी ग्राउंड फ्लोर पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का म्यूजियम विकसित किया जाएगा, जबकि पहली मंजिल पर परिवार के रहने की व्यवस्था रहेगी।
म्यूजियम में उस्ताद की शहनाइयों, पुरस्कारों, तस्वीरों और उनसे जुड़ी यादों को संरक्षित करने की योजना है। इससे आने वाली पीढ़ियों को उनके संगीत और भारतीय संस्कृति में योगदान को करीब से जानने का अवसर मिल सकेगा।
परिवार ने साफ किया है कि फिलहाल पुनर्निर्माण का काम अपने संसाधनों से कराया जा रहा है और इसके लिए सरकार से आर्थिक सहायता नहीं ली गई है। हालांकि, परिवार ने यह भी कहा है कि यदि सरकार उनकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सहयोग करना चाहे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।

सरकार और नगर निगम की क्या है सफाई?
वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि बिस्मिल्लाह खान के मकान को नगर निगम ने नहीं गिराया है। उनके मुताबिक, नगर निगम ने शहर की प्रमुख हस्तियों की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए एक योजना तैयार की थी।
इस योजना के तहत महान विभूतियों के आवास तक जाने वाली सड़कों को उनके जीवन और योगदान से जुड़ी थीम पर विकसित करने तथा उनके घरों के एक कमरे को म्यूजियम के रूप में तैयार करने का प्रस्ताव था।
इसी सिलसिले में बिस्मिल्लाह खान के परिवार से उनके आवास पर म्यूजियम बनाने के संबंध में बातचीत हुई थी। लेकिन नगर निगम के मुताबिक, परिवार ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी। परिवार ने भवन की जर्जर हालत का हवाला देते हुए अपने स्तर पर पुराना ढांचा हटाकर दोबारा निर्माण कराने की इच्छा जताई थी।
नगर निगम का कहना है कि परिवार की सहमति नहीं मिलने के कारण वह इस मकान में अपना प्रस्तावित म्यूजियम प्रोजेक्ट लागू नहीं कर सका। इसलिए मकान तोड़ने की कार्रवाई में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
वीडीए ने जांच के बाद क्या बताया?
सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) ने भी स्थिति की जांच की। प्राधिकरण के सचिव वेद प्रकाश मिश्रा के मुताबिक, संबंधित मकान उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पौत्र मोहम्मद सिब्तैन के स्वामित्व में है। यह मकान चौक क्षेत्र की भिखाशाह गली, सरायहड़हा में स्थित है।
जांच में सामने आया कि भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका था। इसी वजह से परिवार ने पुराने ढांचे को हटाकर उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कराने का फैसला लिया है। परिवार ने पुनर्निर्माण के बाद वहां म्यूजियम बनाने की इच्छा भी जताई है।
VDA ने साफ किया कि इस ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्माण में न तो विकास प्राधिकरण की कोई भूमिका है और न ही जिला प्रशासन की। यानी सरकारी स्तर पर मकान गिराने का कोई अभियान नहीं चलाया गया।
मकान को लेकर परिवार में भी हुआ था विवाद
इस मामले में एक और तथ्य सामने आया है। मकान के कुछ हिस्सों को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच आपसी विवाद था। इसी विवाद के कारण निर्माण कार्य शुरू होने पर परिवार के एक सदस्य ने आपत्ति जताई थी और मामला चौक थाने तक पहुंचा था।
पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर संपत्ति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। इसके बाद परिवार के सदस्यों के बीच विवाद सुलझने की जानकारी सामने आई। चौक थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला के मुताबिक, संपत्ति के मालिक की ओर से ही पुराने भवन को हटाने का काम कराया जा रहा है। भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पहले नगर निगम की ओर से नोटिस भी दिया गया था।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि मकान के पुनर्निर्माण का फैसला केवल अचानक शुरू हुई कोई सरकारी कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसके पीछे भवन की हालत और परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद भी एक कारण था।
करीब एक करोड़ रुपये की सरकारी म्यूजियम योजना क्या थी?
इस विवाद का एक दिलचस्प पहलू नगर निगम की प्रस्तावित विरासत संरक्षण योजना भी है। 3 नवंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नगर निगम ने शहर की प्रमुख विभूतियों के घरों को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की थी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, इस योजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, डिजाइन और बजट तैयार किया गया था।
बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी मकान के लिए भी करीब एक करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित थी। लेकिन परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर विवाद और सभी संबंधित पक्षों की सहमति नहीं मिलने के कारण नगर निगम इस मकान पर अपना प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ा सका।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। नगर निगम का प्रस्ताव था कि घर के एक कमरे को म्यूजियम बनाया जाए, जबकि परिवार अब नए भवन के ग्राउंड फ्लोर पर अपना म्यूजियम बनाने की योजना रखता है। दोनों योजनाओं का उद्देश्य विरासत को संरक्षित करना है, लेकिन निर्माण और नियंत्रण का तरीका अलग है।
बिस्मिल्लाह खान का परिवार कितना बड़ा है और मकान किसका है?
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का परिवार वाराणसी में लंबे समय से रहा है। परिवार से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, उनके पांच बेटे और चार बेटियां थीं। उनके बेटों में महताब हुसैन, नैय्यर हुसैन, जामिन हुसैन, काजिम हुसैन और नाजिम हुसैन के नाम सामने आते हैं।
संबंधित पुश्तैनी मकान का स्वामित्व परिवार के सदस्य मोहम्मद सिब्तैन के नाम बताया गया है, जो उस्ताद के बड़े बेटे स्वर्गीय महताब हुसैन के पुत्र हैं। परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी इस मकान से जुड़े रहे हैं। संपत्ति के कुछ हिस्सों को लेकर पहले आपसी असहमति थी, जिसे पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सुलझाए जाने की जानकारी सामने आई।
इसी वजह से इस मामले को केवल सरकार बनाम विपक्ष के विवाद के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसमें परिवार की संपत्ति, भवन की जर्जर स्थिति, सरकारी विरासत योजना और निजी पुनर्निर्माण—चारों पहलू शामिल हैं।

भाजपा और सपा के लिए इस विवाद के राजनीतिक मायने
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। भाजपा सरकार के कार्यकाल में वाराणसी में विकास और विरासत संरक्षण को लेकर कई परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में विपक्ष को सरकार की नीतियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाने का अवसर मिल रहा है।
सपा के लिए संभावित फायदा: अखिलेश यादव इस मुद्दे के जरिए भाजपा को कला, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब के सवाल पर घेरना चाहते हैं। बिस्मिल्लाह खान की शख्सियत केवल संगीत तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे भारतीय सांस्कृतिक एकता की पहचान भी रहे हैं। इसलिए उनके नाम पर राजनीतिक संदेश देने से सपा को सांस्कृतिक विरासत और कलाकारों के सम्मान का मुद्दा उठाने का अवसर मिल सकता है।
सपा के सामने जोखिम: यदि परिवार खुद सामने आकर कहता है कि मकान सरकार नहीं गिरा रही और पुनर्निर्माण उसका अपना फैसला है, तो अखिलेश यादव के आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। विपक्ष के लिए यह जरूरी होगा कि वह किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि करे।
भाजपा और सरकार के लिए फायदा: नगर निगम और VDA की सफाई से सरकार को यह कहने का आधार मिला है कि मकान पर सरकारी बुलडोजर नहीं चला। साथ ही नगर निगम की विरासत संरक्षण योजना को सामने रखकर प्रशासन यह बता सकता है कि शहर की महान हस्तियों की स्मृतियों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार के सामने चुनौती: केवल सफाई देना पर्याप्त नहीं होगा। बिस्मिल्लाह खान जैसे भारत रत्न की सांगीतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए परिवार के साथ समन्वय बनाना और म्यूजियम की योजना को जमीन पर उतारने में मदद करना भी महत्वपूर्ण होगा। परिवार की सहमति से कोई ठोस पहल होती है तो इससे वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान को लाभ मिल सकता है।
आखिर इस मामले की असली तस्वीर क्या है?
अब तक सामने आए परिवार के बयान, नगर निगम की सफाई, VDA की जांच और पुलिस के पक्ष को मिलाकर देखें तो बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी मकान को सरकार द्वारा बुलडोजर से गिराए जाने का दावा प्रमाणित नहीं होता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुराना भवन जर्जर था और परिवार ने उसे अपने स्तर पर हटाकर दोबारा बनाने का निर्णय लिया है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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