
संकट से विश्वास तक: कैसे मोदी सरकार ने सुरक्षित रखी देश की ऊर्जा आपूर्ति ः राजीव जैन
पूर्व महानिदेशक, प्रेस सूचना ब्यूरो , भारत सरकार
लखनऊ | प्रेस बयूरो भारत सरकार के पूर्व महानिदेशक राजीव जैन ने जारी पेट्रोलियम संकट पर कहा कि एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गहरे संकट में डाल दिया है। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। हालात इतने गंभीर हैं कि एशिया के कई देशों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका एक बड़ा भाग इसी मार्ग से आता है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की उपलब्धता व्यापक स्तर पर सामान्य बनी हुई है। यह स्थिति किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, सक्रिय कूटनीति और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी के प्रबंधन का परिणाम है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। कई देशों को आपूर्ति संकट और कीमतों के झटके झेलने पड़े हैं। लेकिन भारत ने समय रहते अपने आयात स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला को पुनर्संतुलित किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में ऊर्जा आपूर्ति “पर्याप्त और सुरक्षित” है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।
विविधीकरण: संकट से सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार भारत की ऊर्जा नीति का सबसे मजबूत आधार है—स्रोतों का विविधीकरण। आज भारत केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि रूस, अमेरिका, ब्राजील और अफ्रीका जैसे कई देशों से तेल आयात कर रहा है। हाल के घटनाक्रम में यह भी देखा गया कि रूस और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाकर भारत ने आपूर्ति संतुलन बनाए रखा। सरकार के प्रयासों से अब लगभग 70% कच्चे तेल का आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बाहर के मार्गों से किया जा रहा है, जिससे जोखिम काफी कम हुआ है। मजबूत भंडार और रिफाइनिंग क्षमता भारत ने इस संकट से पहले ही अपनी रणनीतिक तैयारी मजबूत कर ली थी। देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं, जो अल्पकालिक झटकों को संभालने में सक्षम हैं। साथ ही, भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता—जो दुनिया में अग्रणी है—घरेलू मांग को पूरा करने के साथ अतिरिक्त उत्पादन की भी क्षमता रखती है।
सरकार के त्वरित और ठोस कदम संकट के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए:
• तेल कंपनियों को घरेलू मांग को प्राथमिकता देने के निर्देश
• रिफाइनरियों को अधिकतम उत्पादन बढ़ाने के आदेश
• एलपीजी आपूर्ति को घरेलू उपयोग के लिए प्राथमिकता
• रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए डेटा साझा करने की व्यवस्था
इन कदमों से यह सुनिश्चित हुआ कि संकट का असर आम नागरिक तक न्यूनतम पहुंचे।
रसोई गैस: आम आदमी की सुरक्षा एलपीजी के मोर्चे पर स्थिति सबसे चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि भारत अपनी बड़ी आवश्यकता आयात से पूरी करता है। फिर भी सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी, औद्योगिक उपयोग में अस्थायी कटौती की और वैकल्पिक आयात बढ़ाकर आपूर्ति संतुलित रखी।
मूल्य स्थिरता: आम उपभोक्ता को राहत वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा। ऊर्जा सुरक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है।
इसी दृष्टिकोण के तहत भारत ने तीन प्रमुख स्तंभों पर काम किया:
• सप्लाई का विविधीकरण
• रणनीतिक भंडारण
• वैकल्पिक ऊर्जा (इथेनॉल, गैस आधारित अर्थव्यवस्था)
निष्कर्ष: संकट में भी विश्वास कायम जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, भारत ने संतुलित नीति, समयबद्ध निर्णय और मजबूत प्रशासनिक समन्वय के जरिए स्थिति को संभाला है। यह उदाहरण दिखाता है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट हो, नीति दूरदर्शी हो और निर्णय समय पर लिए जाएं, तो सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
मोदी सरकार ने यह सिद्ध किया है कि संकट के समय भी आम नागरिक का हित सर्वोच्च प्राथमिकता रह सकता है |





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