कांशीराम को मिले भारत रत्न का सम्मान न हो राजनीति ः सुनील वर्मा
लखनऊ। सामाजिक संगठन बैकवर्ड दलित माइनारिटीज फोरम के अध्यक्ष सुनील वर्मा ने बसपा के संस्थापक व दलितों के मसीहा कहे जाने वाले कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न का सर्वोच्च सम्मान दिए जाने की मांग लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी से की है। पीसीएस अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सक्रिय राजनीति मे आमद करने बाद सुनील वर्मा के इस मास्टर स्टोक ने राजनीतिक पार्टियों मे ऐसा हडकंप मचाया की सभी पार्टियां कीर्तन करते नजर आ रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान मे 13 मार्च को सुनील वर्मा ने जब यह प्रस्ताव सौपा तो हजारों की संख्या मे दलित व पिछड़े समाज से आने वाले लोगो ने ध्वनि मत से इसका समर्थन किया, वही राहुल गांधी ने 15 मार्च को देश के प्रधानमंत्री को इस प्रस्ताव के क्रम मे पत्र लिख दिया। वही बसपा सुप्रीमो मायावती जो कि कांशी राम की उतराधिकारी हैं वह भी मैदान मे उतर आयी और कांग्रेस पर ही हमला बोल दिया। कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में कभी भी मान्यवर काशीराम को भारत रत्न का सम्मान दिए जाने की पहल नही की। वही श्री वर्मा की इस पहल ने सपा के पीडीए फार्मूले की भी हवा निकाल दी है। सुनील वर्मा वर्ष 1998 पीसीएस अफसर बनने के बाद सेल टैक्स अधिकारी के रूप में राज्य कर विभाग में तैनात हुए। विभाग में तनाती मिलने के बाद उत्तर प्रदेश जीएसटी ऑफिसर्स एसोसिएशन के 4 साल अध्यक्ष रहने के दौरान आपने दलित अधिकारियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया इसके बाद नवंबर 2025 में उपयुक्त के पद से सेवानिवृत हुए । लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति के दौरान सुनील वर्मा ने इस संगठन की स्थापना की जिसने दलित छात्रों के लिए छात्रावास व अन्य सुविधाओं के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया जिसके लिए सुनील वर्मा तत्तकालीन प्रमुख समाचार पत्रों की सुर्खियों में बने रहे। मीडिया से हुई बातचीत में सुनील वर्मा ने कहा कि उनका भरोसा है कि कांग्रेस उनकी इस मांग को न केवल प्रमुखता से उठाएगी बल्कि हमारे समाज की अपेक्षाओं पर कांग्रेस शत प्रतिशत शत प्रतिशत खरी उतरेगी कयोकि आज के समय मे पुरानी मनुवादी विचार धारा वाली कांग्रेस अब नही रही है।





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