
हड़ताल के बाद कार्रवाई वापस लेने की मांग, ऊर्जा मंत्री से मिला जेई संगठन
लखनऊ । राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उत्तर प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल आज उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा से लखनऊ में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2023 में हुई सांकेतिक हड़ताल के उपरांत बनी सहमतियों के बावजूद कर्मचारियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग उठाई। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष इं. गोपाल वल्लभ पटेल ने बताया कि लेसा के अमौसी जोन में जूनियर इंजीनियरों/प्रोन्नत अभियंताओं एवं अन्य विद्युत कर्मियों के विरुद्ध की गई सामूहिक निलंबन एवं संबद्धीकरण की कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अत्यधिक कार्यदबाव के बावजूद अभियंता दिन-रात विद्युत व्यवस्था के सुचारु संचालन में जुटे हैं। अमौसी जोन का कार्यक्षेत्र मोहनलालगंज से मलिहाबाद तक लगभग 100 किलोमीटर में फैला है, जहां 33/11 केवी के 53 उपकेंद्र, 20 उपखंड एवं 7 खंड कार्यालय संचालित हैं। नए संयोजनों के निर्गमन के लिए मात्र 1 अधिशासी अभियंता, 3 उपखंड अधिकारी और 3 जूनियर इंजीनियर तैनात हैं, जिसे संगठन ने अपर्याप्त बताया। नई वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद 15 नवंबर 2025 से अब तक अमौसी जोन में लगभग 13,760 नए संयोजनों के आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 10,473 का स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है। एक-एक जूनियर इंजीनियर को प्रतिदिन 35-40 स्थलीय निरीक्षण और तकनीकी संभाव्यता रिपोर्ट (TFR) तैयार करनी पड़ रही थी। संगठन के अनुसार, किसी भी अभियंता का निश्चित भौगोलिक क्षेत्र निर्धारित न होने से उन्हें एक ही दिन में 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी, जबकि पर्याप्त वाहन एवं संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए।
केंद्रीय महासचिव इं. बलबीर यादव ने बताया कि OTS कैंप, IGRS, राजस्व वसूली, मीटर इंस्टॉलेशन और रिमूवल जैसे अतिरिक्त दायित्व भी सीमित कार्मिकों द्वारा निभाए जा रहे थे। संगठन ने विशेष रूप से जूनियर इंजीनियर रविंद्र कुमार के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति-पत्र प्राप्त करने वाले अभियंता को 25 फरवरी 2026 को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया जाना मनोबल तोड़ने वाला कदम है।प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से पोर्टल डेटा और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने तथा एकतरफा सामूहिक निलंबन की कार्रवाई तत्काल समाप्त करने की मांग की। साथ ही प्रबंधकीय स्तर पर संसाधनों की कमी की जवाबदेही तय करने का भी आग्रह किया गया। प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय अध्यक्ष इं. गोपाल वल्लभ पटेल, केंद्रीय महासचिव इं. बलबीर यादव, मध्यांचल शाखा के अध्यक्ष इं. डी.के. प्रजापति, उत्पादन निगम शाखा के पूर्व अध्यक्ष इं. अरविंद कुमार त्रिपाठी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).