अब बिना चीर-फाड़ के होगा पोस्टमार्टम! मुंबई के KEM अस्पताल में बनेगा वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर, 3D तकनीक खोलेगी मौत का राज

मुंबई। किसी की मौत हादसे में हुई हो, गोली लगने से या फिर किसी संदिग्ध परिस्थिति में—अब शरीर को चीरे बिना भी कई अहम सवालों के जवाब मिल सकेंगे। मुंबई के परेल स्थित केईएम (KEM) अस्पताल में हाईटेक वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। यहां आधुनिक CT स्कैन और 3D इमेजिंग तकनीक की मदद से मृत शरीर की आंतरिक जांच की जाएगी। इससे फॉरेंसिक जांच को तेज करने और पारंपरिक पोस्टमार्टम पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 30 अक्टूबर को इस परियोजना के लिए करीब 17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इसके तहत ग्राउंड प्लस पांच मंजिल का आधुनिक मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। परियोजना का नाम एडवांस्ड फॉरेंसिक मेडिसिन एंड नॉन-इनवेसिव ऑटोप्सी सेंटर रखा गया है।
CT स्कैन से शरीर की बनेगी 3D तस्वीर
वर्चुअल ऑटोप्सी को 'वर्टॉप्सी' भी कहा जाता है। इसमें पारंपरिक पोस्टमार्टम की तरह शरीर को काटकर आंतरिक अंगों की जांच करने के बजाय CT स्कैन और अन्य इमेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
स्कैन से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की हजारों तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं। विशेषज्ञ इन तस्वीरों और 3D मॉडल का विश्लेषण कर हड्डियों में फ्रैक्चर, अंदरूनी रक्तस्राव, गोली या अन्य बाहरी वस्तुओं की मौजूदगी और चोटों की स्थिति का पता लगा सकते हैं।
इस तकनीक से जांच अधिकारियों को यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि गोली शरीर में किस दिशा से दाखिल हुई या चाकू का घाव कितना गहरा था।

10 मिनट में जांच का दावा कहां से आया?
वर्चुअल ऑटोप्सी की चर्चा में 10 मिनट का समय इसलिए सामने आया है क्योंकि AIIMS दिल्ली में 2021 से इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। AIIMS की रिसर्च के मुताबिक, वहां CT स्कैन के जरिए कुछ ही सेकंड में शरीर की करीब 25 हजार तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं और पूरी प्रक्रिया लगभग 10 मिनट में पूरी हो सकती है।
इसके मुकाबले पारंपरिक पोस्टमार्टम में चार से छह घंटे तक लग सकते हैं। हालांकि, यह समय AIIMS में इस्तेमाल की जा रही तकनीक और प्रक्रिया से जुड़ा है। KEM अस्पताल में प्रस्तावित केंद्र के लिए भी ठीक 10 मिनट का समय तय होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गोली और चाकू के घाव की 3D तस्वीर भी मिलेगी
प्रस्तावित केंद्र में CT स्कैन के साथ 3D स्कैनर और शरीर के हिस्सों के भौतिक मॉडल तैयार करने की सुविधा भी होगी। इससे खोपड़ी और हड्डियों के फ्रैक्चर को मॉडल के रूप में देखा जा सकेगा।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन मॉडल की मदद से चोट की दिशा, गोली के रास्ते और घाव की गहराई का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे। डिजिटल तस्वीरों को देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ साझा कर दूसरी राय लेने की सुविधा भी मिल सकती है। अदालत में जांच से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी साक्ष्य के रूप में पेश किए जा सकेंगे।
परिवारों को भी मिल सकती है राहत
मुंबई के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के फॉरेंसिक विभागों में प्रतिदिन औसतन करीब 10 पोस्टमार्टम किए जाते हैं। काम का दबाव अधिक होने के कारण कई बार परिजनों को शव मिलने के लिए 12 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है।
वर्चुअल ऑटोप्सी से उन मामलों में राहत मिल सकती है, जहां बिना पारंपरिक चीर-फाड़ के जांच संभव हो। धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से पोस्टमार्टम को लेकर आपत्ति करने वाले परिवारों के लिए भी यह विकल्प मददगार हो सकता है।
क्या पारंपरिक पोस्टमार्टम पूरी तरह बंद हो जाएगा?
ऐसा नहीं है। वर्चुअल ऑटोप्सी हर मामले में पारंपरिक पोस्टमार्टम का विकल्प नहीं बन सकती। कुछ मामलों में सूक्ष्म ऊतकों की जांच, संक्रमण या बीमारी से जुड़े बदलावों का पता लगाने और नमूने लेने के लिए पारंपरिक प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए जटिल या विशेष परिस्थितियों वाले मामलों में डॉक्टर पारंपरिक पोस्टमार्टम की सलाह दे सकते हैं। नई तकनीक को जांच का एक अतिरिक्त और आधुनिक माध्यम माना जा रहा है।
कब तक शुरू हो सकता है सेंटर?
KEM अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को लगभग 11 महीने में तैयार करने का लक्ष्य है। टेंडर से जुड़ी प्री-बिड बैठक 5 नवंबर को प्रस्तावित है, जबकि बोली जमा करने की अंतिम तारीख 19 नवंबर रखी गई है।
महाराष्ट्र में इसी तरह की सुविधा दक्षिण मुंबई के जेजे अस्पताल में भी शुरू करने की योजना है। यदि यह पहल सफल रहती है तो राज्य की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है।
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