भारत में रहने के नियम बदले: पाकिस्तान-बांग्लादेश से आए 6 समुदायों को अब लेना होगा वीजा, जानिए किस पर लागू होगा नया आदेश

नई दिल्ली। भारत में रह रहे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के लिए केंद्र सरकार ने आव्रजन नियमों में अहम बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए संशोधन के मुताबिक, धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर से भारत पहुंचे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अब देश में लगातार रहने के लिए उपयुक्त श्रेणी का वीजा प्राप्त करना होगा। यह बदलाव उन लोगों पर लागू होगा, जिन्होंने 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश किया था।
गृह मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्प्शन) अमेंडमेंट ऑर्डर, 2026' जारी किया, जिसे 5 नवंबर को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसके साथ ही सितंबर 2025 में जारी मूल छूट आदेश में संशोधन किया गया है।
पहले क्या थी छूट, अब क्या बदला?
सितंबर 2025 के आदेश के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए छह समुदायों के लोगों को कुछ शर्तों के साथ वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में प्रवेश और रहने से छूट दी गई थी। यह छूट उन लोगों के लिए भी थी, जिनके पास दस्तावेज थे लेकिन उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी।
नए संशोधन में इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बदला गया है। अब ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को भारत में प्रवेश के बाद अपने प्रवास को जारी रखने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना अनिवार्य होगा। यानी पहले मिली छूट के आधार पर बिना वीजा अनिश्चितकाल तक भारत में रहने की सुविधा अब नहीं रहेगी।
किन लोगों पर लागू होगा नया नियम?
नया प्रावधान तीन देशों के छह धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों पर लागू होगा:
हिंदू
सिख
बौद्ध
जैन
पारसी
ईसाई
इसके लिए शर्त है कि संबंधित व्यक्ति धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय के कारण भारत में शरण लेने को मजबूर हुआ हो और उसने 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत में प्रवेश किया हो। यह प्रावधान अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए संबंधित लोगों के लिए है।
क्या भारत में बिना दस्तावेज प्रवेश की छूट भी खत्म हो गई?
नहीं। नए आदेश को समझने में यह अंतर महत्वपूर्ण है। संशोधन में संबंधित समुदायों के लोगों को बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के भारत में प्रवेश से मिलने वाली छूट बरकरार रखी गई है। बदलाव मुख्य रूप से भारत में आगे रहने की अनुमति से जुड़ा है, जिसके लिए अब उपयुक्त वीजा लेना होगा।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि छह समुदायों के लोगों के लिए भारत में प्रवेश के सभी पुराने प्रावधान खत्म कर दिए गए हैं। नए आदेश में प्रवेश और निरंतर प्रवास के नियमों को अलग-अलग रखा गया है।
कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण में राहत
इसी संशोधन में कुछ अन्य श्रेणियों के लोगों को भी राहत दी गई है। इसमें ऐसे पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट पर स्थायी रूप से भारत में रहने के इरादे से आए थे, लेकिन पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत पहचान पत्र (CNIC) नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट नवीनीकृत नहीं करा पा रहे हैं।
इसके अलावा, विभाजन के बाद पाकिस्तान गए कुछ भारतीय मूल के मुस्लिम पुरुषों और मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले कुछ भारतीय मूल के लोगों के लिए भी निर्धारित शर्तों के साथ पासपोर्ट संबंधी राहत दी गई है। इन श्रेणियों के लोगों को भी भारत में लगातार रहने के लिए उपयुक्त वीजा लेना होगा।
CAA और नए वीजा आदेश में अंतर समझना जरूरी
नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 और 2026 का यह नया आव्रजन आदेश अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं। CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह समुदायों के उन लोगों के लिए नागरिकता का प्रावधान है, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश किया था और कानून की अन्य शर्तें पूरी करते हैं।
वहीं, नए आव्रजन संशोधन में 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए पात्र लोगों के देश में निरंतर प्रवास के लिए वीजा की शर्त जोड़ी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वीजा मिलते ही किसी व्यक्ति को स्वतः भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। नागरिकता के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और पात्रता शर्तें लागू रहेंगी।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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