
राज्य कर विभाग की लखनऊ एसआईबी जोन प्रथम की सीट पर तैनाती पर लगी रोक
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग मे कोर्ट के स्थगन आदेश की अहमियत को सीधे शब्दो मे समझा दी है इसके बाद भी अगर शासन या मुख्यालय ने कोर्ट के आदेश का पालन नही किया तो कई लोगो को कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड सकता है।
पूर्व प्रमुख सचिव एम देवराज ने लखनऊ के एडीशनल कमिशनर ग्रेड 2 संजय मिश्रा ज्वाइंट कमिशनर सुशील कुमार सिंह व घनश्याम मद्धेशिया को एक ऐसे मामले मे निलंबित किया था, जिसकी एसआईबी जांच पूरी भी नही हुई थी,लेकिन साहब ने इन अधिकारियों को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया। जिसके खिलाफ तीनो अधिकारी कोर्ट चले गए और कोर्ट ने तीनो ही अधिकारियों के निलंबन पर स्थगन आदेश दे दिया, लेकिन शासन ने कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी इन अधिकारियों की बहाली नही की। इसी बीच लखनऊ एसआईबी जोन प्रथम के एडीशनल कमिशनर ग्रेड 2 के पद पर अन्य अधिकारी की स्थाई तैनाती भी शासन ने कर दी, जिसको संजय मिश्रा ने कोर्ट मे चुनौती दी। जिसके बाद कोर्ट ने शासन से पूछा है कि स्थगन आदेश के बाद उस सीट पर किसी दूसरे अधिकारी की तैनाती कैसे की गयी है, इस मामले मे विभाग को कोर्ट मे जवाब देना है। इसी तरह अम्बेडकर नगर खंड दो मे तैनात राज्य कर अधिकारी इन्द्र प्रताप सिंह की रिट नंबर 312 के मामले मे कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद उनको उसी पद पर पदभार ग्रहण करवाया गया है। कोर्ट का यह फैसला विभाग के लिए बडी नजीर बना है कि स्थगन आदेश के बाद उस पर किसी दूसरे अधिकारी की तैनाती नही की जा सकती, कयोकि अगर स्थगन आदेश के बाद दूसरे अधिकारी की उस.पद पर तैनाती हुई तो निलंबन बिना तबादले के सीट खाली करवाने का एक अच्छा विकल्प बन सकता है।





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