
सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने कांवड़ियों की सेवा कर दिया “सेवा परमो धर्म:” का संदेश
लखनऊ । ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुवाई में शिवरात्रि के पावन अवसर पर चिनहट फैजाबाद मार्ग स्थित वीमार्ट के पास गुरुवार 12 से रविवार 15 फरवरी तक कांवड़ियों के लिए फलाहारी जलपान एवं खीर की सेवा दी जा रही है। इस क्रम में शुक्रवार 13 फरवरी को सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने स्वयं कावड़ियों की सेवा करके सेवा परमो धर्म: का संदेश दिया। वहां भगवान महादेव का आकर्षक दरबार भी सजाया गया है। इसके साथ ही वहां कांवड़ियों के विश्राम, स्नान और उपचार आदि की भी पर्याप्त सुविधा दी जा रही हैं। इस क्रम में शिवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर विश्व शान्ति और राष्ट्र उन्नति हेतु आचार्यों द्वारा रविवार 15 फरवरी को हवन पूजन चिनहट स्थित श्री परमानंद हरि हर मंदिर परिसर में किया जाएगा। उसके उपरांत चित्रकूट में सामूहिक सुंदरकांड का पाठ मंगलवार 10 मार्च 2026 को होगा। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने इस अवसर पर आध्यात्मिक संदेश दिया कि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। शिवरात्रि का अर्थ है 'शिव की महान रात्रि'। यह रात अज्ञानता और अहंकार के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और विवेक के प्रकाश को जगाने का प्रतीक है। इस दिन 'शिव तत्व' जो कि शाश्वत चेतना है पृथ्वी के सबसे निकट होती है। जो हमें संदेश देती है कि परमात्मा कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही है। 'शिवोहम' महामंत्र का भी यही सार है। शिव और शक्ति स्वरूपा देवी मां पार्वती का विवाह भौतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक है। शिव को 'अद्वैत' और 'शून्य' माना गया है। शिवरात्रि हमें सिखाती है कि जब हम अपने भीतर की सारी हलचल शांत कर लेते हैं, तब उस असीम शून्यता से ही नई शक्ति और शांति का जन्म देते हैं। शिवरात्रि पर पूरी रात का जागरण केवल शारीरिक रूप से जागना नहीं है, बल्कि सचेत होकर अपने विकारों जैसे कि काम, क्रोध, लोभ को पहचानने और उन्हें त्यागने का संकल्प लेना है। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने बताया कि संतों और देवों की पावन भूमि भारत, दोबारा विश्व गुरु बने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही सुंदरकांड महा अभियान का संचालन किया जा रहा है। बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के उपलक्ष्य में पांच हजार से अधिक मातृशक्तियों द्वारा लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान सम्पन्न करवाया गया था। इस क्रम में जिलों से दिलों तक को जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तीर्थाटन का सिलसिला भी शुरू किया गया है। इसके तहत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, नैमिषारण्य तीर्थ, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर और कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगा जी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही बीते साल 11 सितम्बर से अयोध्या जी में प्रभु राम जी की जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके साथ ही स्वदेशी अभियान का संदेश भी उनके माध्यम से वृहद रूप से संचालित किया जा रहा है।





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