
राज्य कर मे रिक्त पदो पर तैनाती व पदोन्नति की जिम्मेदारी किसकी ।
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग मे राजस्व कम हो जाए, टैक्स चोरी का माल निकल जाए, जीएसटी मे फर्जी फर्म पकडी जाए तो विभाग के अधिकारी जिम्मेदार लेकिन राज्य कर अधिकारियों व सहायक आयुक्तों की समय पर पदोन्नति नही हो पायी कई जोनो मे एडीशनल कमिशनर ग्रेड 2 व ग्रेड 1 के पर खाली चल रहे है, लेकिन इन पदों पर अधिकारियों की तैनाती आज तक नही हो पायी है इसके लिए राज्य सरकार किस नौकरशाह की जिम्मेदारी तय करेगी यह अभी तक यक्ष प्रशन बना हुआ है ऐसे मे यह सवाल उठना लाजमी है कि कया राज्य मे नौकरशाहों व अधिकारियों के लिए अलग अलग व्यवस्था चल रही है।
पहले हम बात करते है उन 60 राज्य कर अधिकारियों की जिनकी करीब दस साल की सेवाएं पूरी हो चुकी है, लेकिन डीपीसी नही हुई। इसी तरह.पदोन्नति से सहायक आयुक्त बने करीब 50 अधिकारी जिनकी उपायुक्त पदो पर पदोन्नति होनी है जो कि नही हो सकी है, जबकि प्रमुख सचिव नियुक्ति ने 15 सितंबर तक पदोन्नति के लिए डीपीसी करवाए जाने के निर्देश दिए थे। विभाग की दूसरी रोचक समस्या अपील की है, एक तरफ विभाग के अधिकारियों पर दबाव है कि अपील के मामलो का जल्द से जल्द निस्तारण हो वही कानपुर की छह एडीशनल कमिशनर ग्रेड 2 अपील की चार पीठ रिक्त चल रही है। आठ अधिकारियों के लिफाफे बंद होने के कारण उनकी पदोन्नति नही हो पा रही है। करीब 32 अधिकारियों के निलंबन पर कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी बहाली नही हो सकी है। गाजियाबाद ग्रेड वन के दोनो पदो पर किसी अधिकारी की स्थाई तैनाती नही हुई है। सहारनपुर मे ग्रेड वन का एक पद रिक्त है, इसी तरह कानपुर जोन दितीय का एक पद, लखनऊ जोन मे ग्रेड वन का एक पद, अयोध्या मे एक पद, गोरखपुर मे एक पद, प्रयागराज मे एक पद, अलीगढ़ मे एक पद, बरेली मे एक पद इसलिए खाली है कयोकि पदोन्नति पा चुके कुल 9 अधिकारियों को तैनाती नही मिल सकी है। ऐसे मे एक ही अधिकारी पर दो दो पदो की जिम्मेदारी सौपकर कार्य मे गुणवत्ता व राजस्व वृद्धि की अपेक्षा सरकार और नौकरशाहों द्वारा किया जाना उतना ही सत्य है जितना की मगरमच्छ का शाकाहारी होना।





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