
2026 में चार ग्रहण, 3 मार्च को भारत में दिखेगा खग्रास चंद्रग्रहण
वाराणसी। सनातन ज्योतिष पद्धति के अनुसार वर्ष 2026 (विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947) में कुल चार ग्रहण लगेंगे—दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण। इनमें से केवल एक खग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 17 फरवरी 2026 को कंकणाकृति सूर्यग्रहण तथा 12 अगस्त 2026 को खग्रास सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे। 28 अगस्त 2026 का खण्डग्रास चंद्रग्रहण भी भारतीय क्षेत्र में नहीं दिखाई देगा। हालांकि 3 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन खग्रास चंद्रग्रहण भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा। काशी में भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे तथा मोक्ष सायं 6:47 बजे होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।
यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है। कुछ राशियों के लिए सावधानी, संयम और आर्थिक नियंत्रण की सलाह दी गई है, जबकि कुछ के लिए लाभ और सुखद परिणाम बताए गए हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक स्पर्श समय से 9 घंटे पूर्व प्रारंभ माना जाता है। सूतक काल में मंदिर प्रवेश, मूर्ति स्पर्श और भोजन आदि से परहेज की परंपरा है। ग्रहण के समय स्नान, दान, जप और मंत्र साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जहां ग्रहण दृश्य होता है, वहीं सूतक और धार्मिक नियम प्रभावी माने जाते हैं।





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