राम मंदिर चढ़ावा मामले में SC का बड़ा फैसला, जांच की निगरानी खत्म; अब निचली अदालत में चलेगा मुकदमा

नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन और चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 2 नवंबर को अहम आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निचली अदालत पर छोड़ दी है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि विशेष जांच दल (SIT) आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुका है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अयोध्या के संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को मुकदमे की सुनवाई के दौरान निचली अदालत की सहायता करने की अनुमति भी दी है।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा था मामला?
मंदिर में चढ़ावे की रकम के हिसाब-किताब और कथित अनियमितताओं को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच और केंद्रीय एजेंसी से पड़ताल कराने जैसी मांगें उठाई थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति पर नजर रखी और उत्तर प्रदेश सरकार से SIT की कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया कि जांच पूरी कर आरोपपत्र निचली अदालत में दाखिल किया जा चुका है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
CCTV फुटेज में सामने आए थे 105 संदिग्ध मामले
SIT ने अपनी जांच के दौरान मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम की गिनती वाले स्थान के CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया था। जांच दल ने कथित तौर पर नकदी को अनधिकृत तरीके से हटाने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान की थी। इस सिलसिले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया।
जांच में आरोपियों के बैंक खातों में संदिग्ध जमा और कथित तौर पर रकम से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई गई। SIT ने वित्तीय लेनदेन और दूसरे दस्तावेजों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मदद भी ली थी।
याचिकाकर्ता अब ट्रायल कोर्ट में रख सकेंगे अपनी बात
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को मुकदमे की कार्यवाही के दौरान अयोध्या की स्थानीय अदालत के समक्ष अपनी बात रखने और जरूरत पड़ने पर सहायता करने की अनुमति दी है। अब आरोपपत्र और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी।
आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया कोई फैसला
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा करने का अर्थ आरोपों को सही या गलत ठहराना नहीं है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। इसका मतलब है कि आरोपियों के खिलाफ आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के बाद ही होगा।
इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिकाओं पर कार्यवाही समाप्त हो गई है, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा मामले की आपराधिक सुनवाई अब निचली अदालत में जारी रहेगी।
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