
सर्वधर्म सम्मेलन में डॉ राजेश्वर सिंह की सहभागिता पार्क के लिए ₹2 लाख डिजिटल लैब हेतु 5 कंप्यूटर का वादा
- सामाजिक समरसता के मंच से विकास का वादा: डॉ. राजेश्वर सिंह ने पार्क व डिजिटल लैब के लिए की घोषणा
- डॉ. राजेश्वर सिंह बोले— सरोजनीनगर बना साझा विरासत और सौहार्द का मॉडल
- डॉ. राजेश्वर सिंह ने सर्वधर्म सम्मेलन से शिक्षा, पर्यावरण और एकता का संदेश दिया
- 26वें सर्वधर्म सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया एकता का संदेश, समरसता को बताया भारत की शक्ति
लखनऊ। सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और सर्वधर्म समभाव की जीवंत मिसाल रविवार को लखनऊ के सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिली, जब ‘आशियाना परिवार’ संस्था द्वारा आशियाना सेक्टर–के स्थित द्विवेदी पार्क में 26वें सर्वधर्म सम्मेलन, वार्षिक बैठक एवं खिचड़ी भोज का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। तथा सर्वधर्म का सन्देश देते हुए अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की आज़ादी से लेकर आज विश्व मंच पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित होने तक, हर धर्म और हर वर्ग का योगदान हमारी सबसे बड़ी ताक़त, सामाजिक समरसता का प्रमाण है। अपने संबोधन में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शिक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि महाकालेश्वर तपोभूमि वैदिक संस्कृत महाविद्यालय एवं गौशाला के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लैब की स्थापना हेतु 5 कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा का समन्वय हो सके। पर्यावरण संरक्षण को सभी धर्मों का साझा संदेश बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण देना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। कार्यक्रम में विधायक ने आशियाना द्विवेदी पार्क के सौंदर्यीकरण हेतु विधायक निधि से अतिरिक्त सहयोग ₹2 लाख की घोषणा भी की। अपने संबोधन में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सामाजिक समरसता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि आज भारत विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में शामिल है और इसके मूल में सामाजिक एकता, सहिष्णुता तथा सर्वधर्म समभाव की भावना है। डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा सामाजिक समरसता में निहित है। उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर आज स्वयं में सामाजिक सौहार्द और साझा विरासत का जीवंत मॉडल बन चुका है। उन्होंने उल्लेख किया कि क्षेत्र में भगवान परशुराम जी की दिव्य प्रतिमा, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी और कल्याण सिंह जी की भव्य प्रतिमा तथा गुरु नानक देव जी के सम्मान में निर्मित गुरु नानक द्वार स्थापित कर सभी विचारधाराओं और आस्थाओं को समान सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे के समक्ष स्थापित स्वर्गीय हेमू कलानी जी की भव्य प्रतिमा सिंधी समाज के योगदान और राष्ट्र के प्रति उनके त्याग का प्रतीक है। इस प्रकार सरोजनीनगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, महापुरुषों और आध्यात्मिक विभूतियों को सम्मानित कर यह संदेश दिया गया है कि भारत की शक्ति विविधता में एकता और साझा सम्मान की भावना में निहित है। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि यह प्रयास किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर समाज, हर आस्था और हर विचारधारा के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए किए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ एकजुट भारत के मूल्यों से प्रेरणा ले सकें। यह देश इसलिए महान है क्योंकि इसकी आज़ादी, इसकी प्रगति और इसकी वैश्विक पहचान में हर धर्म, हर वर्ग और हर संप्रदाय का समान योगदान रहा है।उन्होंने कहा कि अशफाक़ उल्ला ख़ान, रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और बेगम हज़रत महल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग ने यह सिद्ध किया कि भारत की लड़ाई कभी धर्म की नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध थी। उन्होंने कहा कि “सरोजनीनगर केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरा परिवार है” और बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के उत्थान के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न धर्माचार्यों, आयोजन से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं एवं श्रमजीवियों को विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के धर्माचार्य, वरिष्ठ नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, एनसीसी के अनुशासित छात्र-छात्राएँ तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।





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